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भाईंदर-विरार सी-लिंक: देश का सबसे लंबा समुद्री पुल बनेगा, 55 हजार करोड़ की लागत से बदलेगी मुंबई की कनेक्टिविटी |

May 31, 2026 12:00 PM
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भाईंदर (Ralivenews): मुंबई महानगर क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को नई रफ्तार देने वाली एक ऐतिहासिक पहल शुरू होने जा रही है। भाईंदर से विरार के बीच लगभग 30 किलोमीटर लंबे समुद्री सेतु (सी-लिंक) का निर्माण जल्द शुरू होगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा करते हुए बताया कि पूरा होने पर यह देश का सबसे लंबा समुद्री पुल होगा।

परियोजना का विस्तृत स्वरूप

मुख्यमंत्री फडणवीस के अनुसार, मुंबई के वांद्रे-वर्सोवा सी-लिंक को वर्सोवा-भाईंदर कोस्टल रोड से जोड़ा जाएगा। इसके बाद भाईंदर से विरार तक तेज और सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के लिए मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ‘उत्तन-विरार सी-लिंक’ का निर्माण करेगा।
इस विशाल परियोजना में निम्नलिखित घटक शामिल होंगे:

मुख्य समुद्री पुल: 24.35 किलोमीटर लंबा
तीन प्रमुख इंटरचेंज: कुल 30.77 किलोमीट

उत्तन इंटरचेंज: 9.32 किमी
वसई इंटरचेंज: 2.5 किमी
विरार इंटरचेंज: 18.95 किमी

55 हजार करोड़ का निवेश, पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त

इस मेगा प्रोजेक्ट पर कुल अनुमानित लागत लगभग 55,000 करोड़ रुपये आंकी गई है। पर्यावरणीय मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया प्रस्ताव 18 मार्च को स्वीकृत हो चुका है। हालांकि, परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए वन विभाग के ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) का इंतजार किया जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

यातायात संकट को मिलेगी राहत

मुख्यमंत्री फडणवीस ने विश्वास जताया है कि इस सी-लिंक के संचालन में आने से मुंबई महानगर क्षेत्र में ट्रैफिक जाम की समस्या में भारी कमी आएगी। नागरिकों का सफर अधिक तेज, सुरक्षित और आरामदायक बनेगा। साथ ही, उत्तरी उपनगरों और पालघर जिले के बीच कनेक्टिविटी में अभूतपूर्व सुधार होगा।

रिकॉर्ड तोड़ेगा नया सी-लिंक

वर्तमान में 22 किलोमीटर लंबे अटल सेतु (मुंबई-नेरुल) को देश का सबसे लंबा समुद्री पुल माना जाता है। भाईंदर-विरार सी-लिंक इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए नया इतिहास रचेगा।

टाइमलाइन: कब शुरू होगा निर्माण?

एमएमआरडीए की योजना के अनुसार:दिसंबर 2026 तक: निविदाएं जारी करने का लक्ष्य
वर्ष 2027: निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना यह परियोजना मुंबई महानगर क्षेत्र के बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाली साबित हो सकती है।

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