वसई: वसई-विरार शहर और मुंबई-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) के किनारे अवैध रूप से निर्माण कार्य का मलबा (डेब्रिज) फेंकने की समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है। वसई-विरार महानगरपालिका द्वारा बड़ी-बड़ी कार्ययोजनाओं के दावे तो किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई न होने के कारण शहर के कई प्रमुख इलाके मलबे के यार्ड में तब्दील होते जा रहे हैं।
रात के अंधेरे में हाईवे और खाली जमीनों पर डंपिंग मुंबई और आसपास के इलाकों में चल रहे पुनर्विकास (Redevelopment) और नए कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स से निकलने वाले मलबे को निर्धारित स्थानों पर फेंकने के बजाय ठेकेदार रात के अंधेरे में वसई-विरार की सड़कों पर डाल रहे हैं। वर्सोवा पुल, ससूनवघर, मालजीपाड़ा, चिंचोटी, नायगांव, सातीवली फाटा और पेल्हार से लेकर विरार तक हाईवे के दोनों ओर मलबे के पहाड़ खड़े दिखाई देते हैं।

बाढ़ और जलभराव का बढ़ा खतरा अवैध डंपिंग से न केवल शहर की सुंदरता को दाग लग रहा है, बल्कि प्राकृतिक नालों का प्रवाह भी अवरुद्ध हो रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि भूखंड भराव (Land Filling) के नाम पर मिट्टी की जगह मलबे का उपयोग किया जा रहा है, जिससे बारिश का पानी जमीन में सोख नहीं पा रहा और मानसून के दौरान भयंकर जलभराव की स्थिति पैदा हो रही है।
अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी जिलाधिकारी के निर्देश पर वर्सोवा पुल के पास एक विशेष चेकपोस्ट बनाई गई थी, जहाँ राजस्व विभाग, पुलिस, NHAI और मनपा को मिलकर कार्रवाई करनी थी। लेकिन विभागों के बीच आपसी समन्वय न होने से भू-माफिया और डंपर चालक बेखौफ घूम रहे हैं।
- NHAI के प्रबंधक सुहास चिटणीस का कहना है कि वे मलबा हटाते हैं और जुर्माना भी लगाते हैं, लेकिन जब तक सभी एजेंसियाँ एक साथ सख्त रुख नहीं अपनाएंगी, तब तक इस पर रोक लगाना मुश्किल है।
- वहीं मनपा के अतिरिक्त आयुक्त संजय हेरवाडे ने सफाई दी कि मलबा नियंत्रण के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं। फिलहाल कर्मचारी एसआईआर (SIR) कार्य में व्यस्त हैं, जिसके पूरा होते ही अवैध डंपिंग के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाएगा।
पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि इस अवैध खेल पर तुरंत लगाम नहीं लगाई गई, तो वसई-विरार जल्द ही “कचरा भूमि” (Garbage Land) में तब्दील हो जाएगा।











