वाराणसी: धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में आस्था, श्रद्धा और उल्लास का एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। क्षत्रिय स्वर्णकार समाज की ओर से लगातार 72वें वर्ष बाबा काल भैरव की भव्य रजत (चांदी) प्रतिमा शोभायात्रा पूरी भव्यता के साथ निकाली गई। पारंपरिक वेशभूषा में सजे समाज के लोगों ने एक आकर्षक और सुसज्जित रथ पर विराजमान बाबा काल भैरव की रजत प्रतिमा का नगर भ्रमण कराया, जिसके दर्शन के लिए भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा।

जयघोष और भजनों से गुंजायमान हुई शिव की नगरी
इस ऐतिहासिक शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाज के पदाधिकारी, युवा और महिलाएं शामिल हुए। यात्रा के पूरे मार्ग पर ‘जय बाबा काल भैरव’ के गगनभेदी जयघोष, ढोल-नगाड़ों की थाप और मधुर भजन-कीर्तन से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। शहर के विभिन्न चौराहों और रास्तों पर श्रद्धालुओं ने पलक-पावड़े बिछाकर बाबा का स्वागत किया। जगह-जगह पुष्पवर्षा कर भक्तों ने बाबा काल भैरव से सुख, शांति और अटूट समृद्धि की कामना की।
72 वर्षों से अनवरत जारी है आस्था का यह सफर
क्षत्रिय स्वर्णकार समाज के पदाधिकारियों ने गर्व से बताया कि यह दिव्य शोभायात्रा पिछले 72 वर्षों से निरंतर बिना रुके निकाली जा रही है। यह न केवल समाज की गहरी आस्था का प्रतीक है, बल्कि काशी की सनातन धार्मिक परंपरा का एक अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। बेहद श्रद्धा और अद्वितीय उत्साह के साथ संपन्न हुई इस शोभायात्रा ने एक बार फिर काशी की समृद्ध सांस्कृतिक एवं अलौकिक धार्मिक विरासत की भव्य झलक पेश की।









