भाईंदर: मिरा रोड पश्चिम में स्थित लगभग 318 एकड़ भूमि को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। विधानसभा सत्र के दौरान राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे के निर्देश के पश्चात इस भूमि को वर्ग-2 (Class-2) श्रेणी में शामिल कर सरकारी नियंत्रण में ले लिया गया है।
भूमि का इतिहास और विवाद
यह भूमि सीआरजेड-2 (CRZ-2) क्षेत्र के अंतर्गत आती है। वर्ष 2024 में मिरा-भाईंदर महानगरपालिका ने निर्धारित शर्तों के साथ इस क्षेत्र में मलबा (डेब्रिज) भरने की अनुमति प्रदान की थी। इस प्रक्रिया के दौरान संबंधित संस्था ने विभिन्न न्यायालयों के आदेश और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। हालांकि, संबंधित संस्था इस 318 एकड़ जमीन पर स्वामित्व का दावा करती रही है, जिसका अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 15 हजार करोड़ रुपये बताया जा रहा है।

अनियमितताओं की रिपोर्ट और सरकारी समीक्षा
प्रशासन के अनुसार, भूमि लीज से जुड़ी होने और इस मामले में लगातार शिकायतें प्राप्त होने के बाद राज्य सरकार ने पूरे प्रकरण की समीक्षा की। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि जहां मलबा भरने की अनुमति थी, वहां कथित रूप से मिट्टी डाली गई। राजस्व विभाग की रिपोर्ट में इस अनियमितता का उल्लेख किया गया है, जिससे सरकारी राजस्व को हानि पहुंचने की आशंका व्यक्त की गई है। इस संबंध में स्थानीय नागरिकों ने भी प्रशासन के समक्ष शिकायतें दर्ज कराई थीं।
भविष्य की कार्रवाई और जांच जारी
सरकारी निर्णय के पश्चात अब इस भूमि से जुड़े किसी भी प्रकार के लेन-देन, विकास कार्य या स्वामित्व संबंधी दावे के लिए पूर्व सरकारी अनुमति अनिवार्य होगी। इसके अतिरिक्त, प्रस्तावित दहिसर-भाईंदर एलिवेटेड रोड परियोजना भी इसी क्षेत्र से गुजरने वाली है, जिससे इस भूमि का रणनीतिक महत्व और बढ़ गया है। ठाणे के उपजिल्हाधिकारी संदीप माने के अनुसार, इस भूमि को वर्ग-2 में शामिल करने की प्रक्रिया लगभग पंद्रह दिन पूर्व पूर्ण कर ली गई है। फिलहाल, मामले से जुड़े सभी पहलुओं की प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा की जा रही है और जांच जारी है।






