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श्रद्धा वालकर हत्याकांड: 4 साल बाद भी न्याय का इंतजार, आत्या राजल नाईक ने न्यायिक प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल |

August 10, 2026 2:32 PM
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मुंबई/वसई: देश को झकझोर कर रख देने वाले बहुचर्चित श्रद्धा वालकर हत्याकांड को चार साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार को अब तक न्याय नहीं मिल सका है। अदालती कार्यवाही में हो रही असाधारण देरी को लेकर श्रद्धा की आत्या (फूफी) राजल नाईक ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया के समक्ष आकर खुलासा किया कि मामले पर आवाज उठाने के बाद से उन्हें लगातार संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय कॉल आ रहे हैं।

‘पाकिस्तान से आ रहे हैं अनजान फोन कॉल’

राजल नाईक ने गंभीर सुरक्षा चिंताओं का खुलासा करते हुए बताया कि जब से उन्होंने मीडिया के सामने आकर अपनी बात रखनी शुरू की है, उन्हें पाकिस्तान के नंबरों से अज्ञात कॉल आ रहे हैं। उन्होंने कहा, “मुझे इस बात को लेकर डर सता रहा है कि ये कॉल क्यों आ रहे हैं। सुरक्षा के लिहाज से मैं अनजान कॉल नहीं उठाती और मैंने उन सभी कॉल्स के स्क्रीनशॉट संभालकर रखे हैं। हालांकि अभी तक कोई सीधी धमकी नहीं मिली है, लेकिन मैं जल्द ही इस मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराऊंगी।”

‘जेल में शिक्षा देने का क्या औचित्य?’

आरोपी के जेल में पढ़ाई करने और न्यायिक देरी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राजल नाईक ने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “जिस तरह से हत्याकांड की साजिश रची गई, उससे आरोपी के शातिर दिमाग का पता चलता है। क्या उसे जेल में शिक्षा देकर दिमाग को और विकसित किया जा रहा है? अगर आरोपी को फांसी की सजा दी जानी है, तो फिर इस लंबी कानूनी प्रक्रिया और पढ़ाई का क्या अर्थ है?” उन्होंने महाराष्ट्र की त्वरित न्याय प्रणाली का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि आखिर इस मामले में ही इतनी देरी क्यों हो रही है।

‘क्या जज और वकील मैनेज हो गए हैं?’

अदालती प्रक्रिया से निराश राजल नाईक ने न्याय व्यवस्था पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, “मामले में केवल ‘तारीख पर तारीख’ मिल रही है। समझ नहीं आता कि क्या जज और वकील मैनेज हो चुके हैं?”

अंतिम संस्कार के लिए नहीं मिल सकी बेटी की अवशेष

श्रद्धा के पिता की अधूरी इच्छा का जिक्र करते हुए राजल नाईक भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि श्रद्धा के पिता अपने जीवनकाल में बेटी के अवशेषों में से एक हड्डी मांगते रहे ताकि उसका अंतिम संस्कार किया जा सके, लेकिन उन्हें वह भी नसीब नहीं हुई। श्रद्धा के माता-पिता का निधन हो चुका है और भाई को सुरक्षा कारणों से मीडिया से दूर रखा गया है। उन्होंने मांग की है कि मुकदमे की सुनवाई फास्ट-ट्रैक मोड पर की जाए और आरोपी को जल्द से जल्द सख्त सजा दी जाए।

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