मुंबई के सायन रोड ओवर ब्रिज (ROB) के पुनर्निर्माण कार्य में रेलवे इंजीनियरिंग ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। नए ओवरब्रिज के निर्माण के तहत मात्र 6 घंटे की समय सीमा के भीतर 500 टन वजनी दोनों मुख्य सेमी-थ्रू स्टील गर्डरों की सफल लॉन्चिंग पूरी कर ली गई है। इस अत्यंत कठिन और चुनौतीपूर्ण काम को माटुंगा और कुर्ला के बीच रात के समय लिए गए दो विशेष 3-3 घंटे के कॉरिडोर ब्लॉक के दौरान अंजाम दिया गया।
इंजीनियरिंग की मिसाल: नागपुर में बने, सायन में जुड़े विशाल गर्डर
सायन आरओबी के नए ढांचे को और अधिक मजबूत व चौड़ा बनाया गया है, जो आधुनिक तकनीक और सटीक योजना का उत्कृष्ट उदाहरण है।
- गार्डर का वजन व आकार: प्रत्येक गर्डर की लंबाई लगभग 54.5 मीटर है और इनका कुल वजन करीब 500 टन है।
- नागपुर से असेंबली तक का सफर: इन भारी-भरकम गर्डरों का निर्माण नागपुर में हुआ था, जिसके बाद इन्हें सायन लाकर साइट के पूर्वी छोर पर असेंबल किया गया।
- बढ़ा हुआ स्पैन (चौड़ाई): पुराने पुल का स्पैन केवल 40 मीटर था, जिसे बढ़ाकर अब 54.5 मीटर कर दिया गया है। यह बदलाव सीएसएमटी–कुर्ला 5वीं और 6वीं रेलवे लाइन के निर्माण को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
ईस्ट-वेस्ट कनेक्टिविटी होगी मजबूत, वैकल्पिक मार्गों से मिलेगा छुटकारा
सीएसएमटी–कुर्ला 5वीं और 6वीं लाइन परियोजना का यह आरओबी बेहद अहम हिस्सा है। इस नए ब्रिज के तैयार होते ही:
- ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे (EEH), एलबीएस रोड और धारावी रोड के बीच ईस्ट-वेस्ट कनेक्टिविटी फिर से बहाल हो जाएगी।
- पुराने जर्जर पुल के बंद होने से रोजाना लंबा चक्कर लगाकर सफर करने वाले लाखों वाहन चालकों और यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
मध्य रेलवे की दूरदर्शी प्लानिंग और तालमेल के चलते यात्रियों व लोकल ट्रेनों की आवाजाही में कम से कम व्यवधान पैदा करते हुए इस काम को पूरा किया गया। अब परियोजना अपने अंतिम चरण में पहुँच चुकी है, जिसमें डेक स्लैब, एप्रोच रोड, क्रैश बैरियर और कंक्रीट रोड सर्फेसिंग का काम तेजी से शुरू कर दिया गया है।











