वसई: वसई-नायगांव-विरार क्षेत्र के कोलीवाड़ों (मछुआरा बस्तियों) में पीढ़ियों से रहने वाले हजारों परिवारों के भूमि अधिकारों और गांवठाण विस्तार (Gaothan Extension) को लेकर मुंबई मंत्रालय में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक का नेतृत्व वसई की स्थानीय विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने किया, जबकि इसकी अध्यक्षता महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने की।

घरों के नीचे की जमीन होगी स्थानीय निवासियों के नाम
बैठक के दौरान कोलीवाड़ों की जमीन और स्थानीय निवासियों के मालिकाना हक का मुद्दा प्रमुखता से उठा। इसमें विशेष रूप से मांग की गई कि:

- नायगांव, मालोंडे, रानगांव, पाचूबंदर सहित विभिन्न कोलीवाड़ों का जल्द से जल्द आधिकारिक सर्वेक्षण (Survey) और सीमांकन किया जाए।
- वर्तमान में जहां स्थानीय लोगों के घर बने हुए हैं, उस जमीन का वास्तविक मालिकाना हक संबंधित निवासियों के नाम हस्तांतरित किया जाए।

विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने बैठक में इस बात पर जोर दिया कि दशकों से रह रहे इन भूमिपुत्रों को उनका जायज अधिकार मिलना चाहिए, ताकि वे बिना किसी डर के अपने आशियाने में रह सकें।
राजस्व मंत्री के निर्देश: 1 जनवरी 2011 की कट-ऑफ डेट तय
विधायक स्नेहा दुबे पंडित द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने पालघर जिला प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने इस प्रक्रिया को गति देने के लिए निम्नलिखित कड़े निर्देश जारी किए:

- गांवठाण घोषणा: जिन क्षेत्रों में अभी तक गांवठाण घोषित नहीं किया गया है, वहां पालघर जिला प्रशासन तुरंत कार्रवाई शुरू करे।
- कट-ऑफ डेट और प्लॉट साइज: 1 जनवरी 2011 को आधार तिथि (कट-ऑफ डेट) मानते हुए, उस समय मौजूद 500 से 1500 वर्गफुट तक के घरों के नीचे की जमीन का मालिकाना हक वहां के निवासियों के नाम करने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
- योजना का जुड़ाव: इस पूरी कार्यवाही को सरकार की ‘सभी के लिए आवास’ योजना के तहत पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

अधिकारियों को समन्वय बनाने के निर्देश
इस महत्वपूर्ण बैठक में पालघर की जिलाधिकारी इंदुराणी जाखर, भूमि अभिलेख (Land Records) विभाग के आला अधिकारी और विभिन्न संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
विधायक स्नेहा दुबे पंडित का बयान: “यह वसई-विरार के भूमिपुत्रों के अधिकारों की बड़ी जीत है। मैंने सभी विभागों से आपसी समन्वय के साथ इस काम को तेजी से पूरा करने की अपील की है। इससे हजारों नागरिकों को अपनी संपत्ति का मालिकाना हक मिलेगा, जिससे वे कानूनी रूप से भवन निर्माण की अनुमति और सभी जरूरी नागरिक सुविधाएं हासिल कर सकेंगे।”






