वसई:
वसई-विरार शहर महानगरपालिका (VVMC) में वर्ष 2022 से 2025 के दौरान मंजूर की गई 80 से अधिक पुनर्विकास (Redevelopment) परियोजनाओं में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। प्रशासन की आंतरिक जांच में खुलासा हुआ है कि नियमों को ताक पर रखकर डेवलपर्स को तय सीमा से अधिक अतिरिक्त एफएसआई (FSI) मंजूर की गई। इस गड़बड़ी के सामने आने के बाद अब महानगरपालिका के सामने भारी प्रशासनिक और कानूनी संकट खड़ा हो गया है।
पूर्व अधिकारियों के कार्यकाल पर सवाल, ED की कार्रवाई के बाद खुली पोल
गौरतलब है कि वर्ष 2020 से 2025 के दौरान महानगरपालिका में तत्कालीन आयुक्त अनिलकुमार पवार प्रशासक के रूप में और वाय. एस. रेड्डी नगर रचना उपसंचालक के पद पर कार्यरत थे। इसी अवधि में नगर विकास विभाग (Town Planning Dept) में नियमविरुद्ध स्वीकृतियां दिए जाने के गंभीर आरोप उठे थे। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद जब पुराने मामलों की फाइलें दोबारा खंगाली गईं, तब इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ।
नियमों की अनदेखी कर बांटी गई अतिरिक्त FSI
जांच में पाया गया कि यूडीसीपीआर (UDCPR 2020) के तहत सड़क की चौड़ाई, इमारत की ऊंचाई और अन्य अनिवार्य शर्तों को पूरा न करने के बावजूद डेवलपर्स को मनमाने ढंग से अतिरिक्त FSI मंजूर की गई। नगर रचना विभाग के उपसंचालक मनीष भिष्णूरकर ने बताया कि ऐसे लगभग 80 संदिग्ध मामलों को चिह्नित कर राज्य सरकार के नगर विकास विभाग से मार्गदर्शन मांगा गया है।
ओसी (Occupancy Certificate) को लेकर फंसा कानूनी पेच
प्रशासन ने राज्य सरकार से स्पष्ट दिशा-निर्देश मांगे हैं कि:
- क्या तत्कालीन अधिकारियों द्वारा दी गई अवैध मंजूरी के आधार पर बने पूरे निर्माण को ओसी (OC) दी जाए?
- या फिर नियमों से अधिक किए गए FSI निर्माण को अवैध घोषित कर केवल वैध हिस्से को ही ओसी प्रदान की जाए?
- ऐसे मामलों में जिम्मेदार डेवलपर्स और अधिकारियों पर क्या कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाए?
महारेरा में पंजीकृत प्रोजेक्ट्स: बेकसूर घर खरीदार अधर में
इस पूरे प्रशासनिक फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा खमियाजा आम घर खरीदारों को भुगतना पड़ सकता है। इनमें से कई बिल्डिंग्स ‘महारेरा’ (MahaRERA) में पंजीकृत हैं और नागरिकों ने वैध मंजूरी देखकर अपने सपनों का आशियाना खरीदा था।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि अधिकारियों और बिल्डरों की मिलीभगत से अनियमितता हुई है, तो उसकी सजा नियमपूर्वक घर खरीदने वाले आम नागरिकों को क्यों मिले? क्या शासन दोषी अधिकारियों और डेवलपर्स पर कठोर कार्रवाई करेगा या आम जनता की ओसी लटकी रहेगी?











