मुंबई। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने फिल्म निर्माण की दुनिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के बढ़ते उपयोग को लेकर एक अहम बयान दिया है। उन्होंने फिल्मकारों और रचनाकारों से एआई का इस्तेमाल सोच-समझकर और जिम्मेदारी से करने की अपील की है। राज्यपाल का मानना है कि एआई ने रचनात्मक क्षेत्र में नई और अनगिनत संभावनाएं तो खोली हैं, लेकिन इसके साथ ही फिल्म निर्माताओं के बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्क रहना जरूरी है।
एमआईएफ-2026 के समापन समारोह में कही बात
राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा मुंबई में आयोजित 19वें द्विवार्षिक मुंबई अंतरराष्ट्रीय लघु फिल्म, वृत्तचित्र एवं एनीमेशन महोत्सव यानी एमआईएफ-2026 के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। सात दिनों तक चले इस बड़े फिल्म महोत्सव में दुनिया भर के 46 देशों की कुल 1459 फिल्मों ने हिस्सा लिया। इस दौरान 42 से अधिक भारतीय भाषाओं और 30 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं की फिल्मों को प्रदर्शित किया गया।
वृत्तचित्रों की भूमिका और युवाओं-महिलाओं को प्रोत्साहन
अपने संबोधन में राज्यपाल ने वृत्तचित्र फिल्मों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वृत्तचित्र समाज की सच्चाई को सामने लाते हैं, इतिहास को सुरक्षित रखते हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करते हैं। उन्होंने ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के युवा फिल्मकारों से अपनी स्थानीय परंपराओं, संघर्षों और अनुभवों पर आधारित फिल्में बनाने का आग्रह किया। इसके अलावा, उन्होंने फिल्म निर्माण में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया।
तकनीक का असर और पुरस्कार विजेताओं का ऐलान
राज्यपाल ने कहा कि तकनीक में हुई प्रगति के कारण अब फिल्म बनाने की प्रक्रिया ज्यादा आसान और सुलभ हो गई है, जिससे नए रचनाकारों को मौके मिल रहे हैं। उन्होंने एमआईएफ और विश्वविद्यालयों के मीडिया विभागों के बीच मिलकर काम करने की जरूरत पर भी बात की।
समापन समारोह के दौरान पुरस्कारों का ऐलान भी किया गया। पोलैंड की फिल्म ‘सिल्वर’ को सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र के लिए गोल्डन कॉंच पुरस्कार मिला। ईरान की फिल्म ‘अंडर द स्नो’ को सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय लघु फिल्म और जर्मनी की ‘मायाज सॉन्ग’ को सर्वश्रेष्ठ एनीमेशन फिल्म का सिल्वर कॉंच पुरस्कार दिया गया। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक आशुतोष गोवारिकर सहित फिल्म जगत की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।



