ठाणे विधानपरिषद चुनाव 2026 को लेकर महायुति के भीतर अंदरूनी समीकरण तेज हो गए हैं। भारतीय जनता पार्टी और एकनाथ शिंदे गुट के बीच सीट बंटवारे को लेकर चल रही चर्चाओं ने अब नया राजनीतिक आयाम ले लिया है। इस संभावित चुनावी समीकरण में वसई-विरार महानगरपालिका में सत्ताधारी बहुजन विकास आघाड़ी (बविआ) के 71 वोटों की भूमिका अचानक निर्णायक हो गई है।
संख्यात्मक समीकरण:
स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों के वोटों के आधार पर देखें तो ठाणे विधानपरिषद सीट पर बीजेपी का पलड़ा भारी माना जा रहा है। बीजेपी के पास करीब 444 नगरसेवकों का समर्थन है, जबकि शिंदे गुट के पास लगभग 346 वोट उपलब्ध हैं। हालांकि, ठाणे जिले को उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का राजनीतिक गढ़ माना जाता है, जिस कारण शिंदे गुट इस सीट को अपने पास बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।
बविआ से संपर्क के संकेत:
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, शिंदे गुट के संभावित उम्मीदवार और पूर्व विधान परिषद सदस्य रविंद्र फाटक ने हाल ही में बविआ प्रमुख भाई ठाकुर और क्षितिज ठाकुर से मुलाकात की थी। यह मुलाकात विधानपरिषद चुनाव में बविआ के समर्थन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मानी जा रही है।
इसी क्रम में बीजेपी के स्थानीय नेताओं ने भी इस सीट पर अपनी दावेदारी मजबूत करनी शुरू कर दी है। पार्टी के भीतर यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि ठाणे में बढ़ते जनाधार को देखते हुए अब बीजेपी को अपना उम्मीदवार उतारना चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी सांसद डॉ. हेमंत सावरा और विधायक राजन नाईक ने बविआ के पूर्व महापौर राजीव पाटिल से भी मुलाकात की है, जिसमें विधानपरिषद चुनाव में संभावित समर्थन पर चर्चा हुई।
विश्लेषण:
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि बविआ के 71 वोट किसी एक पक्ष के साथ मजबूती से जुड़ते हैं, तो ठाणे विधानपरिषद चुनाव का पूरा गणित बदल सकता है। इसी कारण वर्तमान परिदृश्य में बविआ की भूमिका सबसे निर्णायक मानी जा रही है। आगामी दिनों में दोनों पक्षों की रणनीति और बविआ की अंतिम स्थिति चुनावी नतीजों की दिशा तय करेगी।





